बुक वैल्यू क्या होता है | What is Book Value in Hindi

किसी भी कंपनी के एनालिसिस में हमें ज्यादा से ज्यादा चीजों को देखना चाहिए और हम इस post में एक बेहद ही महत्व का कॉन्सेप्ट बुक वैल्यू को जानेंगे।

बुक वैल्यू कंपनियों के एनालिसिस के लिए एक बेहद ही इम्पोर्टेंट नंबर होता है। और ऐसा माना जाता है कि अगर कंपनी की मार्केट वैल्यू उसके बुक वैल्यू से कम है तो वह कंपनी UNDERVALUED हो सकती है और एक अच्छा इनवेस्टमेंट साबित हो सकती है।

इसलिए आप इस विडियो को आखिर तक पूरा जरूर देखें जिसमें आप जानेंगे कि बुक वैल्यू क्या होता है यह कैसे कैलकुलेट होता है इससे हमें क्या पता चलता है और हमें इसे कैसे इस्तेमाल करना चाहिए।

बुक वैल्यू क्या है – What is Book Value?

आइए जानते हैं कि एक कंपनी की बुक वैल्यू क्या होती है।

किसी भी कंपनी के पास अवेलेबल सारी चीजों को हम दो भागों में बांट सकते हैं – ऐसेट्स और लायबिलिटीस।

ऐसेट्स में वह सारी चीजें आती हैं जो कंपनी OWN करती है और अगर कंपनी चाहे तो उसे कैश में बदल सकती है।

वहीं लायबिलिटीस में वो सारी चीजें आती हैं जो कंपनी ने उधार ले रखा है और इसे भविष्य में लौटाना पड़ेगा।

जब हम कंपनी के टोटल ऐसेट्स में से कंपनी की टोटल लायबिलिटीस को बाद करते हैं तो हमें कंपनी के बचे हुए ऐसेट्स की एक वैल्यू मिलती है, जिसमें पूरा हक कंपनी का होता है और हम इन्हीं बचे हुए ऐसेट्स की वैल्यू को कंपनी की बुक वैल्यू कहते हैं।

बुक वैल्यू को हम कंपनी का नेटवर्थ, शेयरहोल्डर इक्विटी, Owner’s Equity या Stock Holder equity भी कहते हैं।

बुक वैल्यू की गणना कैसे की जाती है – How Book Value is Calculated?

BOOK VALUE CALCULATION FORMULA :

Book value = Total Assets – Total Liabilities

आइए हम बुक वैल्यू को दो अलग अलग तरह के उदाहरण से समझते हैं। पहले उदाहरण में मान लेते हैं मिस्टर जॉन के पास ये सारी चीजें हैं जिसकी मार्केट वैल्यू आज के टाइम पर कुछ इस तरह है।

first example of Book Value calculation

इन्हें हम मिस्टर जॉन का ऐसेट कहेंगे और साथ ही मिस्टर जॉन ने इतने तरह के लोन भी ले रखा है। दोस्तो हम यहां देख सकते हैं कि मिस्टर जॉन की टोटल ऐसेट की वैल्यू 70 लाख रुपए है।

वही मिस्टर जॉन की टोटल डायबिटीज है 27 लाख रुपये। हमें मिस्टर जॉन की बुक वैल्यू या नेटवर्थ निकालने के लिए उनके टोटल ऐसेट्स में से टोटल डायबिटीज को बाद करना होगा। यानी मिस्टर जॉन का नेटवर्थ होगा टोटल ऐसेटस 70 लाख रुपये माइनस टोटल LIABILITY 27 लाख रुपये। यानी 43 लाख रुपए। और इस तरह हम कहेंगे कि मिस्टर जॉन की नेटवर्थ आज 43 लाख रुपये है।

दूसरे उदाहरण में हम मान लेते हैं। एक कंपनी है एबी लिमिटेड जिसका बैलेंस शीट इस तरह है। यहां पर हम देख सकते हैं कि एबी लिमिटेड कंपनी का टोटल ऐसेट है 1370 करोड़ रुपए। वही टोटल लायबिलिटी है 300 करोड़ रुपये। आइए अब हम एबी लिमिट के बुक वैल्यू को कैलकुलेट करते हैं।

SECOND example of Book Value calculation

एबी लिमिटेड के बुक वैल्यू को निकालने के लिए हमें एबी लिमिटेड के टोटल ऐसेट्स में से टोटल LIABILITY को माइनस करना होगा। यानी एबी लिमिट की बुक वैल्यू होगा –

बुक वैल्यू इक्वल टू टोटल ऐसेट्स माइनस टोटल लायबिलीटीज। यानी 1370 करोड़ रुपए माइनस 300 करोड़ रुपए। यानी कि 1070 करोड़ रुपए। और इस तरह हम कहेंगे कि ए बी लिमिट का बुक वैल्यू या नेटवर्थ है 1070 करोड़ रुपए।

दोस्तों बुक वैल्यू को समझने का एक आसान तरीका यह है कि अगर हम कंपनी के टोटल ऐसेट को सेल कर दें और उससे जो पैसे आएं उन पैसों से हम कंपनी की टोटल लायबिलिटी को Repay कर दें, फिर इसके बाद हमारे पास जो भी पैसा बचा रहेगा उसे ही हम कंपनी का बुक वैल्यू कहते हैं।

बुक वैल्यू को समझने का एक आसान तरीका

हमारे एग्जाम्पल में एबी लिमिटेड के टोटल ऐसेट की वैल्यू उसकी बैलेंस शीट के हिसाब से 1370 करोड़ रुपए है और अगर हम इन सारे ऐसेट को सेल करके कैश में बदल दें तो हमें 1370 करोड़ रुपये मिलेंगे।

फिर हम इन पैसों से कंपनी की टोटल लायबिलितिज यानी 300 करोड़ रुपये को Repay कर देंगे। जिसके बाद हमारे पास 1370 करोड़ रुपए माइनस 300 करोड़ रुपए यानी कि 1070 करोड़ रुपए बचेंगे और यही एबी लिमिटेड की बुक वैल्यू है।

दोस्तों हमे बुक वैल्यू को इस तरह calculate करने की जरूरत नहीं होती है। पर क्योंकि हमें ये समझना बहुत जरूरी है कि आखिर बुक वैल्यू से हमें क्या पता चलता है इसलिए हमने इसे example से कैलकुलेट करना सीखा। पर हम हर कंपनी के बुक वैल्यू को कंपनी की बैलेंस शीट में असानी से देख सकते हैं।

बुक वैल्यू को शेयर होल्डर्स इक्विटी भी कहा जाता है। और हमें एबी लिमिटेड की बैलेंस शीट में देख सकते हैं कि यहां पर कंपनी का टोटल शेयरहोल्डर्स इक्विटी दिया गया है 1070 करोड़ रुपए। इस तरह हम किसी भी कंपनी की बैलेंस शीट से कंपनी की शेयरहोल्डर इक्विटी या बुक वैल्यू को देख सकते हैं।

दोस्तो जनरली बुक वैल्यू को देखने के लिए दो रेशियो का यूज किया जाता है। बुक वैल्यू पर शेयर और प्राइस टु बुक रेशियो।

बुक वैल्यू पर शेयर क्या है – What is Book Value Per Share?

बुक वैल्यू पर शेयर या BVPS को निकालने के लिए कंपनी की बुक वैल्यू को टोटल नंबर ऑफ शेयर से डिवाइड किया जाता है।

CALCULATION OF BOOK VALUE PER SHARE WITH EXAMPLE

जैसे अगर हमारे एबी लिमिटेड के एग्जांपल में मान लेते हैं कि कंपनी के टोटल शेयर है 10 करोड़ और एबी लिमिट की बुक वैल्यू था 1070 करोड़ रुपए। इस तरह एबी लिमिट का बुक वैल्यू पर शेयर हो जाएगा बुक वैल्यू 1070 करोड़ रुपए डिवाइड बाई टोटल नंबर ऑफ शेयर्स 10 करोड़। जो हो जाएगा 107 रुपए पर शेयर। इसका मतलब हुआ कि एबी लिमिटेड के एक शेयर की बुक वैल्यू 107 रुपए है। और अगर एबी लिमिटेड ही शेयर प्राइस 107 रुपए से काफी कम हो जाए तो यह एक अंडर वैल्यूड स्टॉक हो सकती है।

एक बात ध्यान देने वाली है कि हमें अक्सर कंपनियों के एनालिसिस में या कई स्टॉक रिसर्च वेबसाइट्स पर बुक वैल्यू लिखा हुआ मिलता है जो असल में कंपनी का बुक वैल्यू पर शेयर ही होता है। तो आप इस बात का जरूर ध्यान रखें।

प्राइस टु बुक रेशियो क्या है – What is Price to Book Ratio?

दूसरा रेशियो है प्राइस टु बुक रेशियो जिसे हम PB RATIO भी कहते हैं। इसे निकालने के लिए हम कंपनी के शेयर प्राइस को उसके बुक वैल्यू पर शेयर से डिवाइड करते हैं और अगर इसकी वैल्यू 1 से कम आती है तो इसका मतलब है कि कंपनी के शेयर प्राइस उसके बुक वैल्यू पर शेयर से कम है और कंपनी अंडरवैल्युड हो सकती है।

CALCULATION OF PRICE TO BOOK RATIO WITH EXAMPLE

जैसे अगर हमारी एबी लिमिटेड के एग्जाम्पल में हम मान लेते हैं कि एबी लिमिटेड का शेयर प्राइस अभी 70 रुपए है और हमने अभी एबी लिमिटेड का बुक वैल्यू 107 रुपए पर शेयर कैलकुलेट किया था। इस तरह एबी लिमिटेड का प्राइस टु बुक रेशियो हो जाएगा – PB RATIO इक्वल टू शेयर प्राइस 70 रुपए डिवाइड बाय बुक वैल्यू पर शेयर 107 रुपए। जो हो जाएगा 0.65 यानी एक से कम।

इसलिए हो सकता है कि एबी लिमिटेड एक अंडरवैल्यूड कंपनी हो और हमें इसका अच्छे से फाइनेंसियल एनालिसिस करना चाहिए।

ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें

दोस्तो बुक वैल्यू से जुड़ी एक बेहद इम्पॉर्टेंट बात हमें जरूर ध्यान रखनी चाहिए। बुक वैल्यू हमें कंपनी के ऐसेट्स और लायबिटीज की वैल्यू बैलेंस शीट के हिसाब से बताता है। यानी जब तक कंपनी की बैलेंस शीट में कंपनी के ऐसेट्स और लाययबिटीज वैल्यू सही लिखी है तब तक हम बुक वैल्यू को सही मान सकते हैं।

पर अक्सर कई वजहों से ऐसेटस और लायबिटीज की वैल्यू बैलेंस शीट के हिसाब से और रियल में काफी अलग हो सकती है। ऐसे में हमें बैलेंस शीट का अच्छे से एनालिसिस करना चाहिए और अपनी समझ से ऐसेट और लायबिटीज की सही वैल्यू के साथ बुक वैल्यू को खुद से कैलकुलेट करना चाहिए।

और इसी वजह से दोस्तो जब भी हमें किसी कंपनी का प्राइस टु बुक रेशियो एक से कम मिले तो सीधे उसे एक अंडरवैल्युड स्टोक नहीं मानना चाहिए। बल्कि हमें उस कंपनी के बैलेंस शीट को अच्छे से डिटेल में स्टडी करना चाहिए।

इनवेस्टिंग एक इंटेलेक्चुअल और इमोशनल गेम है। इस खेल में जीतने के लिए हमें ना सिर्फ अपनी रिसर्च और एनालिसिस को दूसरों से अच्छा करना होगा बल्कि साथ में अपने इमोशंस को भी कंट्रोल करना होगा। ताकि जब मार्केट क्रैश हो और अच्छी कंपनी हमें सस्ते प्राइस पर मिले तब हम बिना डर के उस वक्त इनके शेयर्स खरीद सके।

हम उम्मीद करते हैं कि आप बिल्कुल ऐसा ही करेंगे और लॉन्ग टर्म में अपने लिए अच्छी वेल्थ बनाएंगे।

दोस्तो तो ये था हमारा आज का टॉपिक बुक वैल्यू के ऊपर इसमें हमने जाना कि बुक वैल्यू क्या होता है, यह कैसे कैलकुलेट होता है, इससे हमें क्या पता चलता है और हम इसे कैसे इस्तेमाल करना चाहिए। अगर आपको ये पसंद आया हो जरूर शेयर कीजिए। अगर आप इस मुद्दे से रिलेटेड कोई भी सवाल करना चाहते हैं तो नीचे कमेंटमें जरूर लिखें।

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